lo mashalo ko jaga dala kisi ne

lo mashalo ko jaga dala kisi ne

Prasoon Joshi pens poems for Anna's movement

 

 

लो मशालो को  जगा डाला किसी ने ,

भोले थे ,अब कर दिया भाला किसी ने ,

लो मसालों को  जगा डाला किसी ने ||

है सहर ये कोयलों का ये मगर  न भूल जाना||२||

लाल शोले भी रहते है, इसी बस्ती मे युगों से |

रास्तो में धुल है ,कीचड़ है ,पर ये याद रखना ||२||

ये जमीं दुल्थी रही संकल्प वाले आंसुओ से ,

मेरे आगन को है धो डाला किसी ने ||२||

लो मशालो को  जगा डाला किसी ने ,

भोले थे, अब कर दिया भाला किसी ने ||

आग  भेवज है कभी  घर से निकलती ही नहीं है ||२||

टोलिया जथे बना कर चीख यु चलती नहीं है ,

रात को भी देख ने दो आज तुम सूरज के जलवे ||२||

जब तपेगी ईट तबि  होश मे आयेगे तलवे,

तोड़ डाला मोन का ताला किसी ने ||२||

लो मशालो को  जगा डाला किसी ने ,

भोले थे ,अब कर दिया भाला किसी ने ,

लो मसालों को  जगा डाला किसी ने ||

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इतना क्यों सोते है हम ||२||

इतना लम्बा, इतना गहरा, बेसुध क्यों सोते है हम ,

दबे पाँव काली राते आती जाती है,

दबे पाँव क्या कभी बेधक हो जाती है,

और बस करवट लेकर सब खोते है हम |

इतना क्यों सोते है  हम |

नीद है या फिर नशा है कोई,

धीरे धीरे जिसकी आदत पड़ जाती है,

झूठ की बारिस में सच की खामोश बासुरी | | 2 | |

एक झोंके की राह देखती सड़ जाती है ,

बाद में क्यों रोते है हम|

इतना क्यों सोते है हम |

खेत हमारा ,बीज हमारे ,हैरत क्या  अब फसल खड़ी है | | 2 | |

काटनी होगी, छाटनी होगी, आज चुनोती बहुत बड़ी है |

काटे क्यों बोते है हम,

इतना क्यों सोते है हम |

सबने खेला और सब हारे | | 2 | |
बड़ा अनोखा अजब खेल है ,
इंजन काला डब्बे काले बड़ी पुरानी ढीट रेल है,
इ़स रेल क्यों होते है हम|

इतना क्यों सोते है हम|

लोरी नही तमाचा दे दो | | 2 | |
एक छोटी सी आशा दे दो,

वर्ना फिर से सो जायेगे | 2 | | |
सपनों में फिर खो जायेगे |
चलो पाप धोते है हम,

इतना क्यों सोते है, इतना लम्बा, इतना गहरा, बेसुध क्यों सोते है हम ||

**************In English*****************

Itna kyo sothe hai hum ||2||

Itna lamba, itna gahara, besudh kyo sothe hai hum,इतना लंबा इतना गहरा
Dabe pav kaali raaathe aathi jathi hai ,
Dabe pav kya kabhi bedhak ho jathi hai,
Or bas karvat lekar sab khothe hai hum ,

Itna kyo sothe hai hum .

Neend hai ya phir nasha hai koi ,
Dherre dhrre jiski aadat par jathi hai
Juth ki baris mai sach ki khamosh bassuri||2||
Eka jhoke ki raha dekhthi sadh jathi hai

Baad mai kyo rothe hai hum,
Itna kyo sothe hai hum.

Khet hamara beej hamare hairat kya,ab fasale khadi hai||2||
Katni hogi ,chatni hogi ,aaj chunothi bahut bari hai.

Kaate kyo bothe hai hum,itna kyo sothe hai hum
Sabne khela or sab haare||2||
Bara anokha ajab khel hai,
Injzan kala dabbe kaale bari purani deet rel hai .

Ias rail mai kyo hothe hai,
Itna kyo sothe hai hum.

Lori nahi tamacha de do||2||
Eka chothi si aasha de do,
Varna phir se so jayege||2||

Sapno mai phir kho jayege ,
Chalo paap dhothe hai hum,
Itna kyo sothe hai,itana lamba itna ghara besudh kyo sothe hai hum.

Lyrics by Prasoon Joshi.